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पाकिस्तान में शिया-सुन्नी में टकराव:आतंकी संगठन के कहने पर हजारों पाकिस्तानियों ने शिया समुदाय के खिलाफ रैली निकाली, उन्हें काफिर कहा और सबको मारने की धमकी दी

  • मुहर्रम पर आशूरा जुलूस के दौरान शिया धर्म गुरु पर इस्लाम के खिलाफ बोलने का आरोप
  • यहां 5 साल में सैकड़ों शिया मुसलमानों की हत्या हो चुकी है, कई अभी भी लापता

पाकिस्तान में आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा पाकिस्तान (एसएसपी) ने शिया मुसलमानों के खिलाफ सुन्नी समुदाय के लोगों को भड़काना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को इसकी बानगी कराची की सड़कों पर देखने को मिली। यहां हजारों की संख्या में लोग एसएसपी के बुलावे पर प्रदर्शन करने पहुंचे। भीड़ ने ”शिया काफिर हैं” के नारे लगाए। शिया मुसलमानों को जान से मारने की धमकी दी।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी जंग
सोशल मीडिया पर भी शिया-सुन्नी में जंग छिड़ गई। देखते ही देखते ट्वीटर पर #ShiaGenocide ट्रेंड करने लगा। इसमें एक तरफ सुन्नी समुदाय के लोग शियाओं के खिलाफ कमेंट कर रहे थे तो दूसरी ओर शिया समुदाय के लोगों ने इस्लाम और इंसानियत का हवाला देते हुए ऐसे हमले बंद करने की मांग की। शिया समुदाय के एक युवक ने मीट शेयर करते हुए सुन्नी समुदाय से पूछा, ”आप इस्लाम को शांति का धर्म बताते हो और दूसरी ओर इंसानियत का खून भी करते हो।

इस्लाम विरोधी कमेंट करने का आरोप
न्यूज एजेंसी ने बताया कि पिछले महीने मुहर्रम पर आशूरा जुलूस का टीवी चैनल पर प्रसारण किया गया। आरोप है कि इसमें कुछ शिया धर्म गुरुओं ने इस्लाम के खिलाफ कमेंट किया। पाकिस्तान की सोशल एक्टिविस्ट आफरीन ने ट्वीट किया कि इसके बाद से कई शिया मुस्लिमों पर धार्मिक पुस्तकों को पढ़ने और आशूरा जुलूस में हिस्सा लेने के लिए हमला किया गया।

5 साल में सैकड़ों शिया मुसलमानों की हत्या, कई लापता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में पिछले 5 सालों में शिया मुसलमानों के खिलाफ हिंसा काफी बढ़ गई है। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में शिया मुसलमानों की हत्या कर दी गई। हत्या करने के बाद हत्यारे खून से ही शियाओं के घर के बाहर ”शिया काफिर हैं” भी लिखते हैं। इसके अलावा कई शिया समुदाय के युवा, महिलाएं अभी लापता हैं।

कुछ साल पहले तक शिया समुदाय के लोगों को मैसेज के जरिए पहले धमकी दी जाती थी और फिर ग्रेनेड से हमला कर उनकी हत्या कर देते थे। शिया मुसलमानों पर हिंसा करने का आरोप आतंकी संगठन एसएसपी पर ही है।

#NEWSPRAVAKTA #INDIA #NEWSUPDATES

मोदी की वेबसाइट का ट्विटर अकाउंट हैक:पीएम रिलीफ फंड के लिए बिटकॉइन में चंदा मांगा, कुछ ही देर में ट्वीट डिलीट किए; ट्विटर ने कहा- हम तेजी से जांच कर रहे हैं

  • हैकर ने एक ट्वीट में लिखा- यह अकाउंट जॉन विक (hckindia@tutanota.com) ने हैक किया है
  • जुलाई में बराक ओबामा समेत कई हस्तियों और कंपनियों के ट्विटर अकाउंट हैक किए गए थे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट का टि्वटर अकाउंट हैक कर लिया गया। हैकर ने इसमें पीएम रिलीफ फंड में दान करने की अपील की। बताया जा रहा है कि दान क्रिप्टो करेंसी बिटकॉइन में मांगा गया था। हालांकि, यह ट्वीट फौरन डिलीट कर दिया गया। ट्विटर ने कहा है, ‘‘हम सक्रिय रूप से इस मामले की जांच कर रहे हैं। अभी हमें अन्य ट्विटर हैंडल्स के प्रभावित होने की जानकारी नहीं है।’’

हैकर ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘‘यह अकाउंट जॉन विक (hckindia@tutanota.com) ने हैक किया है। हमने पेटीएम मॉल हैक नहीं किया है।’’ ट्विटर ने इसकी पुष्टि की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अकाउंट गुरुवार तड़के सवा तीन बजे हैक किया गया।

जांच में जुटा ट्विटर

ट्विटर ने रॉयटर्स को भेजे अपने बयान में कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेबसाइट का ट्विटर हैंडल हैक होने की जानकारी है। इसकी सुरक्षा के लिए कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट narendramodi.in के ट्विटर अकाउंट @narendramodi_in के 25 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं।

पेटीएम मॉल का जिक्र क्यों किया गया?
दरअसल, 30 अगस्त को साइबर सिक्योरिटी फर्म साइबल ने दावा किया था कि पेटीएम मॉल के डेटा चोरी में जॉन विक ग्रुप का ही हाथ था। पेटीएम मॉल यूनीकॉर्न पेटीएम की ई-कॉमर्स कंपनी है। साइबल का दावा था कि इस हैकर ग्रुप ने फिरौती मांगी थी। हालांकि, पेटीएम ने बाद में दावा किया था कि उसके डेटा में कोई सेंधमारी नहीं हुई।

बिटकॉइन क्या है?
बिटकॉइन एक वर्चुअल करेंसी है। यानी इसका लेनदेन सिर्फ ऑनलाइन होता है। इसे दूसरी करेंसी में भी बदला जा सकता है। यह 2009 में चलन में आई थी। अभी एक बिटकॉइन का रेट करीब 8,36,722 रुपए है।

जुलाई में कई नामी हस्तियों के अकाउंट हैक हुए थे
जुलाई में माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स, अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस, टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा समेत कई नामी हस्तियों के ट्विटर अकाउंट हैक किए गए थे। हैकर्स ने आईफोन कंपनी एपल और कैब सर्विस कंपनी उबर के अकाउंट्स को भी निशाना बनाया था। क्रिप्टो करेंसी फ्रॉड के लिए हैकर्स ने बड़े लोगों के नाम का सहारा लिया था।

लद्दाख में सीमा विवाद भारत चौकस:आर्मी चीफ नरवणे दो दिन के लेह दौरे पर; सेना की तैयारियों का जायजा लेंगे, पैंगॉन्ग झील इलाके में भारत-चीन के सैनिक 6 दिन से आमने-सामने हैं

  • चीन के सैनिकों ने 29-30 अगस्त की रात पैंगॉन्ग के दक्षिणी छोर की पहाड़ी पर कब्जे की कोशिश की थी
  • विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों के आर्मी अफसरों के बीच बैठकों का दौर जारी

आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे गुरुवार को लेह पहुंच चुके हैं। वे शुक्रवार को भी वहीं रहेंगे। इस दौरान सीनियर फील्ड कमांडर उन्हें लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी देंगे। आर्मी चीफ चीन से चल रहे तनाव के बीच भारतीय सेना की तैयारियों का जायजा भी लेंगे। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।

आर्मी चीफ का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब बातचीत के बावजूद चीन भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश कर रहा है। 29-30 अगस्त की रात चीनी सैनिकों ने पैंगॉन्ग झीले के दक्षिणी छोर की पहाड़ी पर कब्जे की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जवानों ने नाकाम कर दी। तभी से दोनों के सैनिक आमने-सामने डटे हुए हैं। इसी बीच चीन के सैनिकों ने 1 सितंबर को भी घुसपैठ की

 

पैंगॉन्ग झील के रिछिन ला पर भारतीय जवान डटे हैं
पूर्वी लद्दाख के पैंगॉन्ग झील इलाके में चीन की उकसावे की कार्रवाई से तनाव बना हुआ है। इसे कम करने के लिए बैठकों का दौर जारी है। इसी सिलसिले में दोनों देशों के बीच बुधवार को लगातार तीसरे दिन कमांडर लेवल की बैठक हुई। इस बीच, भारतीय सेना ने उत्तरी छोर पर अपनी तैनाती में बदलाव किया है। सूत्रों के मुताबिक फिंगर-4 की पहाड़ियों पर हमारे सैनिक नहीं हैं। तैनाती में बदलाव एहतियातन किया गया है। यह भी पता चला है कि पैंगॉन्ग से लेकर रेजांग ला और रिछिन ला तक की पूरी रिज लाइन पर भारतीय सेना का दबदबा है।

अब रिछिन ला से लेकर गुरुंग हिल और मगर हिल पर भारतीय सैनिक डटे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि चीनियों को सबसे ज्यादा परेशानी रिछिन ला पर हमारी मौजूदगी से है, क्योंकि वहां से उनका पूरा स्पांगुर गैरीसन निगरानी में आ चुका है। भारत को अब इस मामले में काफी बढ़त मिल चुकी है।

इनसाइड स्टोरी: डेढ़ घंटे में हमारे जवान 4 हजार फीट चढ़ गए थे
उत्तरी कमान और नई दिल्ली में सेना के सूत्रों ने बताया कि रविवार की रात चीन के इलाके वाली ब्लैक टॉप के सामने की तीन चोटियों पर भारतीय सैनिक 12 हजार फीट से करीब 16 हजार फीट की ऊंचाई पर जा पहुंचे। इस तैनाती में महज 80 मिनट लगे। दूसरी ओर चीनी सैनिकों ने भी इसी वक्त लगभग रात 2 बजे ही चढ़ाई शुरू की थी। जब वह चोटियों के नजदीक पहुंचे तो उन्हें भारतीय सैनिक मिले।

 

 

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव:ट्रम्प का गैरकानूनी सुझाव: कहा- नॉर्थ कैरोलिना के लोग दो बार वोटिंग करें, एक बार बैलेट से और दूसरी बार पोलिंग स्टेशन जाकर; इससे सिस्टम की जांच हो जाएगी

  • ट्रम्प ने कहा कि अगर सिस्टम मजबूत होगा तो लोग दोबारा वोट नहीं डाल पाएंगे
  • अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार मेल-इन बैलट वोटिंग पर सवाल उठाते रहे हैं

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में मेल वोटिंग का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लगातार विरोध कर रहे हैं। बुधवार को उन्होंने अजीब सुझाव दिया। कहा- नॉर्थ कैरोलिना के लोगों को दो बार वोटिंग करके इलेक्शन सिस्टम की सिक्योरिटी की जांच करनी चाहिए। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति का यह सुझाव गैरकानूनी है। लेकिन, ट्रम्प का कहना है कि इससे वोटिंग सिस्टम की सही जांच हो सकेगी।

इससे सिस्टम की परख होगी

मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने लोगों को बैलट वोटिंग और चुनाव के दिन खुद जाकर वोट डालने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें बैलट भेजने दें और साथ ही वोटिंग के लिए भी जाने दें। दावा किया जाता है कि हमारा सिस्टम मजबूत है। अगर ये सच है तो लोग दोबारा वोट नहीं डाल पाएंगे। और अगर इस सिस्टम में कोई खामी है तो लोग दो बार भी वोटिंग कर देंगे।’’

ट्रम्प का सुझाव गैरकानूनी

एक ही चुनाव में दो बार वोटिंग गैरकानूनी है। लेकिन, ट्रम्प का यह सुझाव सहयोगियों से चर्चा के बाद आया है। अमेरिका में कोरोना के चलते बैलट से वोटिंग करने वालों की संख्या बढ़ रही है। ट्रम्प इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मेल-इन बैलट वोटिंग में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हो सकती है।

सही सलाह, लेकिन उलझन ज्यादा

ट्रम्प के सलाहकारों ने उन्हें बताया कि सभी तरह के मेल इन बैलट का विरोध न करें। क्योंकि, इससे वे बुजुर्ग और बीमार समर्थकों के वोट खो सकते हैं। इन सलाहकारों ने ट्रम्प से यूनिवर्सल मेल वोटिंग और एब्सेंटी वोटिंग के बीच अंतर करने को कहा है।

एब्सेंटी वोटिंग उन लोगों के लिए होती है जो विकलांग हैं या अपने घर से दूर हैं। उन्हें वोटिंग से पहले एक फॉर्म भरना होता है। इसमें यह बताना होता है कि वे किस वजह से पोलिंग स्टेशन नहीं आ सकते। इसके बाद चुनाव आयोग उन्हें बैलेट पेपर भेजता है। इसके जरिए वे वोटिंग करते हैं। यूनिवर्सल मेल वोटिंग का मतलब है कि हर कोई घर से ही वोट दे सकता है। इसके लिए कोई कारण नहीं पूछा जाता।

दोहरी वोटिंग संभव नहीं

अटार्नी जनरल विलियम बार ने ट्रम्प के बयान पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। हालांकि, राज्यों के पास दोहरी वोटिंग से बचने के लिए कई तरीके हैं। नॉर्थ कैरोलिना स्टेट बोर्ड ऑफ इलेक्शन की वेबसाइट में कई तरह के सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी गई है। पिछले साल एक इंटरव्यू में वॉशिंगटन के सचिव किम वियान ने कहा था कि कोई भी वोटर दोबारा मतदान नहीं कर सकता। वॉशिंगटन में 2018 में मेल वोटिंग से ही चुनाव हुए थे। वियान ने कहा, ‘‘हम उन लोगों की लिस्ट निकाल सकते हैं, जिन्होंने एक से ज्यादा बार वोटिंग की होगी। 2018 में डाले गए 35 लाख बैलट में से लगभग 100 लोगों ने एक से ज्यादा बार वोटिंग की थी।’’

भारतीय सेना की टूटू रेजीमेंट:चीन से लड़ने के लिए तैयार की गई थी एक खुफिया रेजीमेंट, ये सेना के बजाय रॉ के जरिए सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है

  • टूटू रेजिमेंट को शुरुआती दौर में ट्रेनिंग सीआईए ने दी थी, इस रेजीमेंट के जवानों को अमेरिकी आर्मी की ‘ग्रीन बेरेट’ की तर्ज़ पर ट्रेनिंग दी गई
  • पूर्व सेना प्रमुख रहे दलबीर सिंह सुहाग भी टूटू रेजीमेंट की कमान संभाल चुके हैं, पहले इसमें तिब्बती भर्ती होते थे, अब गोरखा जवान भी शामिल

29 अगस्त की रात को चीन की सेना ने लद्दाख में फिर (गलवान के करीब 75 दिन बाद) घुसपैठ की कोशिश की। हालांकि, इस घुसपैठ को भारत के मुस्तैद जवानों ने नाकाम कर दिया। बुधवार को खबर आई कि इस घुसपैठ के दौरान भारत का एक जवान शहीद हो गया। तिब्बती मूल का यह जवान स्पेशल फोर्सेस यानी एक टूटू रेजीमेंट का था। क्या है ये टूटू रेजीमेंट और किस तरह काम करती है, पढ़ें स्पेशल रिपोर्ट…

अक्टूबर 2018 की बात है। यूरोपीय देश एस्टोनिया की मशहूर गायिका यना कास्क भारत आई थीं। वो अपना एक म्यूजिक वीडियो यहां शूट करना चाहती थीं और इसके लिए उन्होंने उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र को चुना था।

देहरादून से करीब 100 किलोमीटर दूर बसा चकराता एक बेहद खूबसूरत पहाड़ी कस्बा है। यहीं पर यना अपने दोस्तों के साथ शूटिंग कर ही रही थीं, लेकिन जैसे ही लोकल इंटेलिजेंस यूनिट को इसकी भनक लगी यना और उनके साथियों को तुरंत हिरासत में ले लिया गया। उन्हें देश छोड़कर जाने का नोटिस थमा दिया गया और स्थानीय पुलिस ने केंद्र सरकार से कहा कि यना को ब्लैक-लिस्ट कर दिया जाए, ताकि वे भविष्य में भारत न आ सकें।

यह सब इसलिए हुआ क्योंकि चकराता एक प्रतिबंधित क्षेत्र है। यहां केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति के बिना किसी भी विदेशी नागरिक को जाने की इजाजत नहीं है। यना इस बात से अनजान थीं और वो बिना किसी परमिशन के ही यहां दाखिल हो चुकी थीं, इसलिए उन्हें इस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

यना की ही तरह ज्यादतर भारतीय भी इस बात से अनजान ही हैं कि चकराता में विदेशियों का आने पर रोक है। यह प्रतिबंध क्यों है, इसकी जानकारी तो और भी कम लोगों को है। चकराता एक छावनी क्षेत्र है जो कि सामरिक दृष्टि से भी काफी संवेदनशील है। यहां विदेशियों के आने पर रोक की सबसे बड़ी वजह है भारतीय सेना की बेहद गोपनीय टूटू रेजीमेंट।

टूटू रेजीमेंट भारतीय सैन्य ताकत का वह हिस्सा है जिसके बारे में बहुत कम जानकारियां ही सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं। यह रेजीमेंट आज भी बेहद गोपनीय तरीके से काम करती है और इसके होने का कोई प्रूफ भी पब्लिक नहीं किया गया है।

पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू ने टूटू रेजीमेंट बनाने का फैसला लिया था

टूटू रेजीमेंट की स्थापना साल 1962 में हुई थी। ये वही समय था जब भारत और चीन के बीच युद्ध हो रहा था। तत्कालीन आईबी चीफ भोला नाथ मलिक के सुझाव पर तब के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने टूटू रेजीमेंट बनाने का फैसला लिया था।

इस रेजीमेंट को बनाने का मकसद ऐसे लड़ाकों को तैयार करना था जो चीन की सीमा में घुसकर, लद्दाख की कठिन भौगोलिक स्थितियों में भी लड़ सकें। इस काम के लिए तिब्बत से शरणार्थी बनकर आए युवाओं से बेहतर कौन हो सकता था। ये तिब्बती नौजवान उस क्षेत्र से परिचित थे, वहां के इलाकों से वाकिफ थे।

जिस चढ़ाई पर लोगों का पैदल चलते हुए दम फूलने लगता है, ये लोग वही दौड़ते-खेलते हुए बड़े हुए थे। इसलिए तिब्बती नौजवानों को भर्ती कर एक फौज तैयार की गई। भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल सुजान सिंह को इस रेजीमेंट का पहला आईजी नियुक्त किया गया।

सुजान सिंह दूसरे विश्व युद्ध में 22वीं माउंटेन रेजीमेंट की कमान संभाल चुके थे। इसलिए नई बनी रेजीमेंट को ‘इस्टैब्लिशमेंट 22’ या टूटू रेजीमेंट भी कहा जाने लगा।

शुरुआत में अमेरिका की खुफिया एजेंसी ने दी थी ट्रेनिंग

दिलचस्प है कि टूटू रेजीमेंट को शुरुआती दौर में ट्रेंड करने का काम अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने किया था। इस रेजिमेंट के जवानों को अमेरिकी आर्मी की विशेष टुकड़ी ‘ग्रीन बेरेट’ की तर्ज़ पर ट्रेनिंग दी गई। इतना ही नहीं, टूटू रेजिमेंट को एम-1, एम-2 और एम-3 जैसे हथियार भी अमेरिका की तरफ से ही दिए गए।

इस रेजीमेंट के जवानों की अभी भर्ती भी पूरी नहीं हुई थी कि नवंबर 1962 में चीन ने एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर दी, लेकिन इसके बाद भी टूटू रेजीमेंट को भंग नहीं किया गया। बल्कि इसकी ट्रेनिंग इस सोच के साथ बरकरार रखी गई कि भविष्य में अगर कभी चीन से युद्ध होता है तो यह रेजीमेंट हमारा सबसे कारगर हथियार साबित होगी।

टूटू रेजीमेंट के जवानों को विशेष तौर से गुरिल्ला युद्ध में ट्रेंड किया जाता है। इन्हें रॉक क्लाइंबिंग और पैरा जंपिंग की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है और बेहद कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने के गुर सिखाए जाते हैं।

1971 में स्पेशल ऑपरेशन ईगल में किया गया था शामिल

अपने अदम्य साहस का प्रमाण टूटू रेजीमेंट ने 1971 के बांग्लादेश युद्ध में भी दिया है, जहां इसके जवानों को स्पेशल ऑपरेशन ईगल में शामिल किया गया था। इस ऑपरेशन को अंजाम देने में टूटू रेजीमेंट के 46 जवानों को शहादत भी देनी पड़ी थी। इसके अलावा 1984 में ऑपरेशन ब्लूस्टार, ऑपरेशन मेघदूत और 1999 में हुए करगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय में भी टूटू रेजीमेंट ने अहम भूमिका निभाई।

शहादत के बदले नहीं मिलता सार्वजनिक सम्मान

इस रेजीमेंट के जवानों का सबसे बड़ा दर्द ये रहा है कि इन्हें अपनी क़ुर्बानियों के बदले कभी वो सार्वजनिक सम्मान नहीं मिल पाया जो देश के लिए शहीद होने वाले दूसरे जवानों को मिलता है। इसके पीछे वजह है कि टूटू रेजीमेंट बेहद गोपनीय तरीके से काम करती रही है। इसकी गतिविधियों को कभी पब्लिक नहीं किया जाता।

यही वजह है कि 1971 में शहीद हुए टूटू के जवानों को न तो कोई मेडल मिला और न ही कोई पहचान मिली। जिस तरह से रॉ के लिए काम करने वाले देश के कई जासूसों की कुर्बानियां अक्सर गुमनाम जाती हैं, वैसे ही टूटू के जवानों के शहादत को पहचान नहीं मिल सका।

बीते कुछ सालों में इतना फर्क जरूर आया है कि टूटू रेजीमेंट के जवानों को अब भारतीय सेना के जवानों जितना ही वेतन मिलने लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ साल पहले कहा था, ‘ये जवान न तो भारतीय सेना का हिस्सा हैं और न ही भारतीय नागरिक। लेकिन, इसके बावजूद भी ये भारत की सीमाओं की रक्षा के लिए हमारे जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं।’

पूर्व सेना प्रमुख दलबीर सिंह संभाल चुके हैं कमान

टूटू रेजीमेंट के काम करने के तरीकों की बात करें तो आधिकारिक तौर पर यह भारतीय सेना का हिस्सा नहीं है। हालांकि, इसकी कमान डेप्युटेशन पर आए किसी सैन्य अधिकारी के ही हाथों में होती हैं। पूर्व भारतीय सेना प्रमुख रहे दलबीर सिंह सुहाग भी टूटू रेजीमेंट की कमान सम्भाल चुके हैं। यह रेजिमेंट सेना के बजाय रॉ और कैबिनेट सचिव के जरिए सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है।

फेसबुक पोस्ट विवाद:कांग्रेस के बाद तृणमूल कांग्रेस ने मार्क जकरबर्ग को चिट्ठी लिखी, कहा- भाजपा और फेसबुक के बीच लिंक है

  • तृणमूल कांग्रेस ने लिखा- भाजपा और फेसबुक के लिंक के सार्वजनिक तौर पर कई सबूत हैं
  • ‘बंगाल में चुनाव के कुछ महीने बचे हैं, फेसबुक ने कई पोस्ट हटानी शुरू कर दी हैं’

फेसबुक पोस्ट विवाद में कांग्रेस के बाद तृणमूल कांग्रेस ने फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग को चिट्ठी लिखी है। इसमें आरोप लगाया गया है कि भाजपा और फेसबुक के बीच कोई लिंक है। पार्टी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने लिखा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव होने में अभी कुछ ही महीने हैं, आपकी कंपनी ने बंगाल में फेसबुक पेज और अकाउंट्स को ब्लॉक करना शुरू कर दिया है। यह इसी कड़ी की तरफ इशारा करता है।

उन्होंने कहा कि दोनों की मिलीभगत के सार्वजनिक तौर पर कई सबूत हैं। इनमें आपकी कंपनी के इंटरनल मेमो भी शामिल हैं। कुछ साल पहले, मैंने आपसे इनमें से कुछ मुद्दों पर चिंता जताई थी। भारत में फेसबुक प्रबंधन के खिलाफ इन गंभीर आरोपों की जांच के मामले में पारदर्शिता रखने की अपील की थी।

एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी चिट्ठी लिखी थी

  • मंगलवार को आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने कहा, ‘आपके कर्मचारियों ने मोदी सरकार के अधिकारियों को अपशब्द कहे और यह ऑन रिकॉर्ड है।’
  • आईटी मिनिस्टर ने कहा-आपकी कंपनी के भीतर से ही चुनकर चीजों को लीक किया जा रहा है, ताकि एक वैकल्पिक झूठ को खड़ा किया जा सके। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और फेसबुक कर्मचारियों का एक ग्रुप बदनीयती रखने वालों को हमारे देश के महान लोकतंत्र पर कलंक

कांग्रेस ने दो बार फेसबुक को चिट्ठी लिखी
फेसबुक हेट स्पीच मामले में कांग्रेस पिछले एक महीने में दो बार लेटर लिख चुकी है। कांग्रेस ने इनमें कहा था कि हेट स्पीच मामले में लगाए गए आरोपों पर आप क्या कदम उठाने जा रहे हैं और क्या उठाए गए हैं।
कांग्रेस ने कहा था कि हम भारत में इस मामले पर कानूनी सलाह ले रहे हैं। अगर जरूरत पड़ी तो कार्रवाई भी की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक विदेशी कंपनी देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान न पहुंचा सके।

राहुल गांधी ने 29 अगस्त को ट्वीट कर कहा था “टाइम ने वॉट्सऐप और भाजपा की साठगांठ का खुलासा किया है। 40 करोड़ भारतीय यूजर वाला वॉट्सऐप पेमेंट सर्विस भी शुरू करना चाहता है, इसके लिए मोदी सरकार की मंजूरी जरूरी है। इस तरह वॉट्सऐप पर भाजपा के नियंत्रण का पता चलता है।” टाइम की रिपोर्ट में कहा गया था कि फेसबुक भाजपा नेताओं के मामलों में भेदभाव करती है। वॉट्सऐप भी फेसबुक की कंपनी है।