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अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव:ट्रम्प का गैरकानूनी सुझाव: कहा- नॉर्थ कैरोलिना के लोग दो बार वोटिंग करें, एक बार बैलेट से और दूसरी बार पोलिंग स्टेशन जाकर; इससे सिस्टम की जांच हो जाएगी

  • ट्रम्प ने कहा कि अगर सिस्टम मजबूत होगा तो लोग दोबारा वोट नहीं डाल पाएंगे
  • अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार मेल-इन बैलट वोटिंग पर सवाल उठाते रहे हैं

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में मेल वोटिंग का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लगातार विरोध कर रहे हैं। बुधवार को उन्होंने अजीब सुझाव दिया। कहा- नॉर्थ कैरोलिना के लोगों को दो बार वोटिंग करके इलेक्शन सिस्टम की सिक्योरिटी की जांच करनी चाहिए। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति का यह सुझाव गैरकानूनी है। लेकिन, ट्रम्प का कहना है कि इससे वोटिंग सिस्टम की सही जांच हो सकेगी।

इससे सिस्टम की परख होगी

मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने लोगों को बैलट वोटिंग और चुनाव के दिन खुद जाकर वोट डालने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें बैलट भेजने दें और साथ ही वोटिंग के लिए भी जाने दें। दावा किया जाता है कि हमारा सिस्टम मजबूत है। अगर ये सच है तो लोग दोबारा वोट नहीं डाल पाएंगे। और अगर इस सिस्टम में कोई खामी है तो लोग दो बार भी वोटिंग कर देंगे।’’

ट्रम्प का सुझाव गैरकानूनी

एक ही चुनाव में दो बार वोटिंग गैरकानूनी है। लेकिन, ट्रम्प का यह सुझाव सहयोगियों से चर्चा के बाद आया है। अमेरिका में कोरोना के चलते बैलट से वोटिंग करने वालों की संख्या बढ़ रही है। ट्रम्प इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मेल-इन बैलट वोटिंग में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हो सकती है।

सही सलाह, लेकिन उलझन ज्यादा

ट्रम्प के सलाहकारों ने उन्हें बताया कि सभी तरह के मेल इन बैलट का विरोध न करें। क्योंकि, इससे वे बुजुर्ग और बीमार समर्थकों के वोट खो सकते हैं। इन सलाहकारों ने ट्रम्प से यूनिवर्सल मेल वोटिंग और एब्सेंटी वोटिंग के बीच अंतर करने को कहा है।

एब्सेंटी वोटिंग उन लोगों के लिए होती है जो विकलांग हैं या अपने घर से दूर हैं। उन्हें वोटिंग से पहले एक फॉर्म भरना होता है। इसमें यह बताना होता है कि वे किस वजह से पोलिंग स्टेशन नहीं आ सकते। इसके बाद चुनाव आयोग उन्हें बैलेट पेपर भेजता है। इसके जरिए वे वोटिंग करते हैं। यूनिवर्सल मेल वोटिंग का मतलब है कि हर कोई घर से ही वोट दे सकता है। इसके लिए कोई कारण नहीं पूछा जाता।

दोहरी वोटिंग संभव नहीं

अटार्नी जनरल विलियम बार ने ट्रम्प के बयान पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। हालांकि, राज्यों के पास दोहरी वोटिंग से बचने के लिए कई तरीके हैं। नॉर्थ कैरोलिना स्टेट बोर्ड ऑफ इलेक्शन की वेबसाइट में कई तरह के सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी गई है। पिछले साल एक इंटरव्यू में वॉशिंगटन के सचिव किम वियान ने कहा था कि कोई भी वोटर दोबारा मतदान नहीं कर सकता। वॉशिंगटन में 2018 में मेल वोटिंग से ही चुनाव हुए थे। वियान ने कहा, ‘‘हम उन लोगों की लिस्ट निकाल सकते हैं, जिन्होंने एक से ज्यादा बार वोटिंग की होगी। 2018 में डाले गए 35 लाख बैलट में से लगभग 100 लोगों ने एक से ज्यादा बार वोटिंग की थी।’’

चीन-अमेरिका में तनाव बढ़ा:चीन ने कहा- अमेरिका के दो जासूसी विमान हमारे देश में घुसे, कुछ भी हो सकता था; अमेरिका बोला- जो किया वो हमारा हक, नियम नहीं तोड़ा

  • इस पूरे मामले की सबसे खास बात यह है कि जिस वक्त अमेरिकी प्लेन चीन में घुसे उस वक्त चीनी सेना मिलिट्री ड्रिल कर रही थी
  • अमेरिका के यू-2 स्पाय प्लेन काफी ऊंचाई से चीनी सेना की हरकतें रिकॉर्ड करते रहे, चीन को इनके लौटने के बाद खबर मिली

अमेरिका और चीन के बीच एक बार फिर तेजी से तनाव बढ़ गया है। चीन का आरोप है कि अमेरिका के दो एडवांस्ड यू-2 स्पाय प्लेन्स (जासूसी विमान) ने पिछले दिनों उसकी सीमा में घुसकर मिलिट्री ड्रिल को रिकॉर्ड किया। घटना उत्तरी चीन में हुई। हालांकि, सटीक लोकेशन की जानकारी नहीं दी गई। अमेरिका ने चीन के आरोप का खंडन तो नहीं किया किया, लेकिन कहा- हमने किसी नियम को नहीं तोड़ा।

दोनों देशों का यह तनाव इसलिए काफी गंभीर है क्योंकि पिछले ही महीने अमेरिका के दो फाइटर जेट्स शंघाई से महज 75 किलोमीटर की दूरी पर काफी देर तक उड़ान भरते नजर आए थे।

चीन ने कहा- ये नो फ्लाय जोन
चीन की डिफेंस मिनिस्ट्री के प्रवक्ता वु क्विन ने कहा- अमेरिकी नेवी के दो यू-2 एयरक्राफ्ट ने उत्तरी इलाके में हमारी सेना के अभ्यास की कई घंटे तक जासूसी की। इससे हमारी ट्रेनिंग पर असर हुआ। अमेरिका ने दोनों देशों के बीच समझौते का उल्लंघन है।

इससे सैन्य झड़प का खतरा
चीन के सरकारी मीडिया ने कहा- अमेरिका की यह हरकत बेहद खतरनाक है। अगर वो चीन के इलाके में घुसेगा तो इससे सैन्य झड़प हो सकती थी। बाद में यह बढ़ भी सकती थी। चीनी सेना वहां एक नहीं बल्कि दो जगह एक्सरसाइज कर रही थी।

अमेरिका ने क्या कहा
अमेरिका ने चीन के आरोपों का खंडन नहीं किया। सीएनएन से बातचीत में यूएस एयरफोर्स ने कहा- हमने अपनी हद में रहकर ही काम किया है। किसी नियम को नहीं तोड़ा। हम पहले भी हिंद महासागर में ऑपरेशन्स करते आए हैं। आगे भी करते रहेंगे। मिलिट्री एक्सपर्ट कार्ल चेस्टर ने कहा- मुझे चीन के दावे पर शक है। अमेरिका एयरक्राफ्ट को चीन में घुसने की जरूरत ही नहीं है। वो इतने हाईटेक हैं कि मीलों दूर से ही हर चीज की जानकारी हासिल कर सकते हैं।

चीन क्यों डरा
यू-2 स्पाय एयरक्राफ्ट पहली बार 1950 में नजर आए। यानी ये करीब 70 साल पुराने हैं। ये कई बार अपग्रेड किए गए। अमेरिका के पास इनसे कई गुना बेहतर स्पायर एयरक्राफ्ट भी हैं। यू-2 70 हजार फीट उपर से जमीन पर हो रही छोटी से छोटी हरकत पर नजर रखा सकता है। फोटोग्राफ ले सकता है और एचडी वीडियो बना सकता है। खास बात ये भी है कि इसे एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल इसे छू भी नहीं सकते।

लकीर पीटती रह गई चीनी सेना
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यू-2 एयरक्राफ्ट कई घंटे तक चीन के आसमान में 70 हजार फीट की ऊंचाई पर मंडराते रहे। पूरी मिलिट्री एक्सरसाइट कैप्चर की। इसके बाद आराम से हिंद महासागर में अपने बेस पर लौट गए। चीन की सेना को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाद में इमेजरी के जरिए इसका पता चला क्योंकि तब इनकी ऊंचाई काफी कम हो गई थी।

चीन को करारा जवाब देने की तैयारी:भारत ने लद्दाख में रूस में बने छोटे एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए, उन्हें कंधे पर रखकर एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर को निशाना बनाया जा सकेगा

 

  • चीन के फाइटर जेट और हेलिकॉप्टरों ने भारतीय एयरस्पेस में घुसने की कोशिश की तो मार गिराया जाएगा
  • चीन के 7 एयरबेस होतान, गारगुंसा, काशगर, हॉपिंग, धोनका जॉन्ग, लिंझी और पैनगैट पर भी भारत की नजर

पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर हालात तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। चीन के हेलिकॉप्टरों की गतिविधि को देखते हुए भारतीय सेना ने यहां छोटे एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं। इनको कंधे पर रखकर भारतीय एयर स्पेस में घुसने वाले चीनी एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टरों को निशाना बनाया जा सकेगा।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि एलएसी के पास ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैनिकों को रूस के इग्ला एयर डिफेंस सिस्टम के साथ तैनात किया गया है। अगर किसी एयरक्राफ्ट ने भारतीय एयरस्पेस में दाखिल होने की गुस्ताखी की तो उसे तुरंत मार गिराया जाएगा। रूस के इस एयर डिफेंस सिस्टम का उपयोग सेना और एयरफोर्स दोनों करती हैं।

भारत ने कर रखी है पूरी तैयारी
चीन की एयर एक्टिविटी पर नजर रखने के लिए भारत ने रडार और सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम तक की तैनाती की है। दोनों देशों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख की गलवान वैली और पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 में चीनी चॉपर्स की एक्टिविटी देखी थी। ये चॉपर भारतीय क्षेत्र में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे। मई के पहले हफ्ते में चीन को जवाब देने के लिए एयरफोर्स ने यहां सुखोई फाइटर जेट्स भी तैनात कर दिए थे।

चीन के सात एयरबेस पर भारत की है नजर
सूत्रों के मुताबिक, चीन के 7 एयरबेस होतान, गारगुंसा, काशगर, हॉपिंग, धोनका जॉन्ग, लिंझी और पैनगैट पर भारतीय एजेंसियां करीब से नजर रख रही हैं। नॉर्थ-ईस्ट के दूसरी ओर स्थित लिंझी एयरबेस मुख्य तौर पर एक हेलिकॉप्टर एयर बेस है। यहां पर पीएलएएएफ ने हेलिपैड का नेटवर्क डेवलप किया है ताकि इस इलाके में निगारनी के ऑपरेशन को बढ़ाया जा सके। ये सभी एयरबेस हाल ही के दिनों में काफी एक्टिव हैं।

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चीन पर एक और स्ट्राइक:रेलवे ने रद्द किया 44 सेमी हाईस्पीड वंदे भारत ट्रेन बनाने का टेंडर, बोली में चीनी कंपनी भी शामिल थी

  • एक हफ्ते में जारी किया जाएगा नया टेंडर, मेक इंडिया को दी जाएगी प्राथमिकता
  • सीमा विवाद के बाद चीनी कंपनियों पर लगातार प्रतिबंध लगा रही है केंद्र सरकार

लद्दाख की गलवान घाटी में सीमा विवाद के बाद भारत की ओर से चीनी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। अब भारतीय रेलवे ने 44 सेमी हाई-स्पीड वंदे भारत ट्रेन बनाने का टेंडर रद्द कर दिया है। समझा जा रहा है कि इन ट्रेनों को बनाने के लिए भारतीय कंपनियों के साथ एक चीनी कंपनी के संयुक्त उपक्रम की ओर से बोली लगाने के कारण रेलवे ने यह फैसला लिया। रेलवे ने ट्वीट के जरिए शुक्रवार देर रात टेंडर रद्द करने की जानकारी दी।

जल्द जारी होगा नया टेंडर

रेलवे के मुताबिक इन ट्रेनों के निर्माण के लिए एक हफ्ते में नया टेंडर जारी किया जाएगा। इस नए टेंडर में मेक इन इंडिया को प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, रेलवे ने मौजूदा टेंडर को रद्द करने की आधिकारिक वजह नहीं बताई है। इन ट्रेनों के निर्माण के लिए टेंडर पिछले महीने खोला गया था। चेन्नई की रेलवे कोच फैक्ट्री ने 10 जुलाई को 44 हाई-स्पीड वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण के लिए टेंडर जारी किया था।

6 में से केवल 1 चीनी कंपनी शामिल थी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 16 डिब्बे वाली 44 वंदे भारत सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए इलेक्ट्रिकल उपकरण और अन्य सामानों की आपूर्ति के लिए 6 कंपनियों ने टेंडर डाला था। इसमें चीनी संयुक्त उद्यम सीआरआरसी-पायोनियर (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड एकमात्र विदेशी कंपनी थी, लेकिन चीन से इसका संबंध होने के कारण टेंडर रद्द कर दिया गया। चीन की कंपनी सीआरआरसी योंगजी इलेक्ट्रिक कंपनी लिमिटेड और गुड़गांव की पायोनियर इलेक्ट्रिक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड ने 2015 में यह ज्वॉइंट वेंचर बनाया था।

1500 करोड़ रुपए की है पूरी परियोजना

न्यूज एजेंसी पीटीआई के सूत्रों के मुताबिक, रेलवे का मानना है कि यह टेंडर किसी घरेलू कंपनी को दिया जाए। टेंडर की रेस में चीनी कंपनी सबसे आगे दिखी तो रेलवे ने टेंडर रद्द कर दिया। इस परियोजना की लागत करीब 1500 करोड़ रुपए है। सूत्रों की मानें तो इस टेंडर के जारी होने के बाद पब्लिक प्रिक्योरमेंट के नियमों में भी कुछ बदलाव किया गया है। नए टेंडर में इन नियमों को भी शामिल किया जाएगा।

इन कंपनियों ने भी लगाई थी बोली

  • भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड
  • भारत इंडस्ट्रीज
  • इलेक्ट्रोवेव्स इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड
  • मेधा सर्वो ड्राइव्स प्राइवेट लिमिटेड
  • पावरनेटिक्स इक्विपमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

दिल्ली-वाराणसी के बीच चलाई गई थी पहली वंदे भारत ट्रेन

देश में दो रूट पर सेमी हाई-स्पीड वंदे भारत ट्रेन का संचालन होता है। फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ​नई दिल्ली-वाराणसी रूट पर देश की पहली वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। इसके बाद दूसरी वंदे भारत ट्रेन नई दिल्ली और कटरा के लिए चलाई गई। इस ट्रेन को गृह मंत्री अमित शाह ने 3 अक्टूबर 2019 को हरी झंडी दिखाई थी।

चीनी कंपनियों के 106 ऐप पर बैन लगा चुका है भारत

लद्दाख की गलवान घाटी में सीमा विवाद के बाद भारत सरकार ने चीन की कंपनियों के 59 ऐप्स पर बैन लगा दिया था। इसमें टिकटॉक, वीचैट, अलीबाबा ग्रुप का यूसी ब्राउजर और यूसी न्यूज जैसे पॉपुलर ऐप शामिल थे। इसके बाद सरकार ने पिछले महीने जुलाई में भी चीन के 47 ऐप्स पर बैन लगाया था। इसमें अधिकांश पहले बैन किए गए ऐप्स के क्लोन थे। इस प्रकार भारत सरकार अब तक चीन के 106 ऐप्स पर बैन लगा चुकी है।